
जहाँ अपील भी बन जाए औपचारिकता, वहाँ RTI कैसे बने पारदर्शिता का हथियार?
रायगढ़= भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने तथा विकास कार्यों की पारदर्शिता के लिए बनाए गए RTI अधिनियमो की जिले में खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। रायगढ़ जनपद पंचायत में सूचना का अधिकार कानून कागज़ी औपचारिकता बनकर रह गया है। ग्राम पंचायत बरदापुटी, बनसिया से जुड़े एक RTI मामले ने प्रशासनिक जवाबदेही की पोल खोल दी है, जहाँ जन सूचना अधिकारी (सचिव) द्वारा समय पर जानकारी न देने के बावजूद अपीलीय अधिकारी जनपद पंचायत रायगढ़ के प्रथम अपील के बाद आवेदक को निशुल्क जानकारी दी जाती है लेकिन
प्रथम अपिलीय अधिकारी के द्वारा उल्टा आवेदक को राशि मांग पत्र का लेटर जारी किया गया है
दरअसल, आवेदक ने 23/11/ 2025 को वर्ष 2020 से 2021 तक के
मनरेगा संबंधित बिंदुओं की जानकारी की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं, लेकिन निर्धारित समयसीमा में न तो सूचना दी गई और न ही कोई जवाब। मजबूर होकर आवेदक ने प्रथम अपील दायर की 21 जनवरी 2026 को हुई अपील की गई फिर प्रथम अपील अधिकारी के द्वारा आवेदक को राशि मांग के लिए 27 जनवरी 2026 को नोटिस भेजा गया बरदापुटी की जानकारी के 6698 रूपए, व बनसिया की जानकारी के लिए 6778 रूपए की माँग की गई है
सबसे गंभीर बात यह कि RTI कानून की समय सीमा में सूचना देने में देरी हुई है और ऐसे में अपील पर जानकारी निःशुल्क दी जाती है। मगर बड़ी विडंबना की बात है कि ग्राम पंचायत बरदापुटी, बनसिया यह पूरा प्रकरण रायगढ़ जनपद में RTI कानून के मज़ाक और दोषियों को संरक्षण देने का
उदाहरण बन गया है।
आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 7(6) के तहत, यदि जन सूचना अधिकारी निर्धारित 30 दिनों की समय सीमा में सूचना प्रदान करने में विफल रहता है, तो प्रथम अपील या उसके बाद आवेदक को सूचना निःशुल्क (फ्री ऑफ कॉस्ट) दी जाती है प्रथम अपील के बाद आवेदक को निःशुल्क जानकारी पाने का अधिकार है
अपीलीय अधिकारी का संरक्षण या अधिनियम की जानकारी का अभाव?
नियम विपरीत आरटीआई की प्रथम अपील करने के मामले में अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या पंचायत के व्याप्त भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए जानबूझकर गुमराह किया जा रहा ? या फिर भ्रष्ट सचिव को जनपद के अपीलीय अधिकारी का खुला संरक्षण प्राप्त है या उन्हें सूचना के अधिकार अधिनियम पूर्ण ज्ञान ही नहीं?
अपीलीय अधिकारी की संदिग्ध भूमिका…
पुरे मामले में कही न कही अपीलीय अधिकारी द्वारा भ्रष्टाचार को छिपाने में सहयोग करने कि बात से इंकार नहीं किया जा सकता। जो कि नैतिक जिम्मेदारियां की विपरीत है और उनके संदिग्ध भूमिका पर सवाल खड़े कर रहे हैं। फिलहाल आवेदक ने दुतीय अपील राज्य सुचना आयोग को अपिल करने कि तैयारी कि जा रही है।
बहरहाल जन सूचना अधिकारी के भ्रष्टाचार और मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए अपील अधिकारी कानून द्वारा नियुक्त है लेकिन जब अपील भी संरक्षण में बदल जाए तो RTI सिर्फ कागज़ों की शोभा रह जाती है।


