, रायगढ़
सितंबर 2026
न्यायधानी से सटे रायगढ़ शहर में सजे 'मीना बाजार' (डिज़्नीलैंड मेला) में नियम-कानूनों को ताक पर रखकर करोड़ों का कारोबार चल रहा है। केवल गेट एंट्री टिकटों पर ही बिना GSTIN और बिना रेट की रसीदें काटने की धांधली सामने नहीं आई है, बल्कि मेले के भीतर लगने वाले 200 से अधिक कमर्शियल स्टॉलों के किराए में भी GST (वस्तु एवं सेवा कर) की सीधी चोरी का मामला गहराता दिख रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस जिले से विधायक ओ. पी. चौधरी प्रदेश के वित्त एवं वाणिज्यिक कर (Commercial Tax) मंत्री हैं, उन्हीं के गृह क्षेत्र में वाणिज्यिक कर विभाग की नाक के नीचे यह मनमानी किसके शह पर चल रही है?
स्टॉल किराए से लाखों का कैश ट्रांजैक्शन, 18% GST गायब
सूत्रों और व्यापारिक गणना के अनुसार मेले के भीतर स्टॉल आवंटन में भारी वित्तीय अनियमितता बरती जा रही है:
200 स्टॉलों का किराया: मीना बाजार में लगभग 200 दुकानें और स्टॉल लगाए गए हैं।
नकद वसूली: प्रति स्टॉल ₹20,000 से ₹25,000 तक का किराया लिया गया है।
लाखों का कुल किराया: 200 स्टॉल × ₹22,500 (औसत किराया) = ₹45 लाख से अधिक की नकद राशि केवल स्टॉल किराए के रूप में आयोजकों ने एकत्र की है।
18% GST की चोरी: नियमानुसार व्यावसायिक जगह या स्टॉल किराए पर देने/लेने की सेवा पर 18% GST लागू होता है। इस हिसाब से केवल स्टॉल किराए पर ही ₹8 लाख से ₹10 लाख का टैक्स सरकार को दिया जाना चाहिए था, जिसे पूरी तरह नकद लेन-देन में छुपा लिया गया।
गंभीर सवाल: क्या परमिशन टैक्स चोरी की छूट के लिए दी गई है?
इस पूरे घटनाक्रम से स्थानीय नागरिकों और व्यापार मंडलों में तीखा आक्रोश है। लोग सीधे तौर पर सवाल पूछ रहे हैं:
अनुमति का दायरा क्या है?: जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा मेले के आयोजन की अनुमति दी गई, तो क्या वाणिज्यिक कर विभाग (Commercial Tax Department) से एडवांस टैक्स (Casual Taxable Person Registration) जमा कराने की जांच नहीं की गई?
विभाग का सर्वे क्यों नहीं?: मेले को शुरू हुए कई दिन बीत चुके हैं। एंट्री गेट से लेकर 200 स्टॉलों में नकद लेन-देन का खेल जारी है, फिर भी राज्य कर (GST) के अधिकारियों ने अब तक औचक निरीक्षण या सर्वे करने की जहमत क्यों नहीं उठाई?
राजनीतिक सरगर्मी: क्या वित्त मंत्री की छवि खराब करने का षड्यंत्र?
रायगढ़ विधायक ओ. पी. चौधरी स्वयं राज्य के वित्त और वाणिज्यिक कर विभाग के कैबिनेट मंत्री हैं। ऐसे में उनके ही विधानसभा क्षेत्र में वाणिज्यिक कर विभाग के स्थानीय अधिकारियों की यह निष्क्रियता और लापरवाही कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रही है।
राजनीतिक गलियारों और आम चर्चाओं में यह सवाल भी कौंध रहा है कि:
"क्या स्थानीय अफसरों और आयोजकों की यह मिलीभगत वित्त मंत्री की सख्त और बेदाग छवि को धूमिल करने का कोई सुनियोजित प्रयास तो नहीं है? या फिर विभागीय लापरवाही का फायदा उठाकर बाहरी आयोजक सरकार के खजाने को चूना लगाकर चंपत होने की फिराक में हैं?"
त्वरित कार्रवाई की मांग
जागरूक नागरिकों ने राज्य शासन और टैक्स विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि:
तत्काल वाणिज्यिक कर विभाग की एंटी-इवेजन विंग (Anti-Evasion Wing) द्वारा मेले में सर्वे की कार्रवाई की जाए।
सभी 200 स्टॉलों के एवज में ली गई रसीदों और आयोजक के खातों की फोरेंसिक जांच हो।
बिना टैक्स चुकाए चल रहे इस अवैध खेल पर भारी पेनल्टी और कानूनी कार्रवाई की जाए।
नोट: यदि स्थानीय प्रशासन या आयोजक का इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान आता है, तो उसे भी खबर मे प्रमुखता से जोड़ा जाएगा।









