रायगढ़ प्रवाह,
एसईसीएल रायगढ़ क्षेत्र की सबसे बड़ी और बहुप्रतीक्षित बरोद (4.9 मिलियन टन) (बिजारी 2.2 मिलियन टन) ओपनकास्ट कोल माइंस विस्तार परियोजना की पर्यावरणीय जनसुनवाई कल 1 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
छाल खदान (6 मिलियन टन) की जनसुनवाई 29 सितंबर को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने के बाद अब पूरे तमनार ब्लॉक की नजर बरोद-पेलमा बेल्ट की इस मेगा परियोजना पर टिकी है।
9 गांव, 2077 हेक्टेयर और 15 मिलियन टन का लक्ष्य
तमनार ब्लॉक में प्रस्तावित इस परियोजना से बरोद, पेलमा, मुरगा, उरबा, चितवाही, कुंजेमुरा, मड़वाडूमर, आमगांव और बरपाली सहित 9 गांव सीधे प्रभावित हो रहे हैं। करीब 2077.328 हेक्टेयर क्षेत्र में 15 मिलियन टन सालाना कोयला उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। यह रायगढ़ जिले की सबसे बड़ी कोयला परियोजनाओं में से एक होगी।
ग्रामीणों की 3 बड़ी मांगों पर टिकी जनसुनवाई
लगातार दो बार जनसुनवाई स्थगित होने के बाद इस बार ग्रामीण आर-पार के मूड में हैं। पिछली बार 21 अगस्त और 25 सितंबर को प्रस्तावित जनसुनवाई ग्रामीणों के भारी विरोध के कारण स्थगित करनी पड़ी थी।
ग्रामीणों का साफ कहना है - "पहले पुनर्वास, फिर विस्तार"
उनकी 3 मुख्य मांगें हैं -
1. पुराने भू-अर्जन का हिसाब: 1963-64 से लंबित भू-अर्जन का पूरा मुआवजा, ब्याज सहित भुगतान और हर विस्थापित परिवार के एक सदस्य को SECL में स्थायी रोजगार।
2. एक समान पुनर्वास नीति: घर के बदले घर, जमीन के बदले जमीन और एक समान मुआवजा नीति। किसी भी गांव के साथ भेदभाव नहीं।
3. जल, जंगल और खेती की सुरक्षा: खदान के कारण जलस्तर गिरने, धूल और ब्लास्टिंग से फसलों के नुकसान की भरपाई की लिखित गारंटी और पर्यावरण सुरक्षा के ठोस उपाय।
ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर कहा था कि जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलता, जनसुनवाई नहीं होने देंगे। प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद ही 1 अक्टूबर की नई तारीख तय हुई है।
प्रशासन अलर्ट पर
कल की जनसुनवाई को देखते हुए प्रशासन ने स्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और टेंट, माइक, पेयजल की तैयारियां शुरू कर दी हैं। एसडीएम, तहसीलदार और पर्यावरण विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद रहेंगे।
सबकी नजरें कल पर - क्या 60 साल से लंबित मांगों के बीच बरोद विस्तार को हरी झंडी मिल पाएगी, यह कल की जनसुनवाई ही तय करेगी।









