मान्यवर,
रायगढ़ में नए पुलिस अधीक्षक के आने के बाद राज्य में अवैध सट्टे के कारोबार पर कुछ लगाम लगी है, यह सत्य है। परंतु यह भी कटु सत्य है कि सट्टे का साम्राज्य आज भी शहर में जीवित है।
जानकारी के अनुसार ये सटोरिए जात-पात और सामाजिक भेदभाव का सहारा लेकर अपना अवैध व्यापार फिर से फुला-फला रहे हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन सटोरियों की जड़ें पुलिस प्रशासन तक जुड़ी हुई हैं, जिसके कारण इन पर हाथ डालना मुश्किल हो रहा है।
हमारी प्रशासन से मांग है कि:
- इन सटोरियों द्वारा अवैध तरीके से कमाए गए काले धन की गहन जांच की जाए। यह पैसा प्रत्यक्ष रूप से नहीं दिखता, लेकिन इसका दुष्प्रभाव पूरे शहर पर पड़ रहा है। आम नागरिक को पता भी नहीं है कि ये लोग करोड़ों रुपये का अवैध व्यापार कर रहे हैं। ये लोग हर साल बैंक खाते बदलते हैं और फर्जी नामों पर खाते खोलकर पैसे को ठिकाने लगाते हैं।
- प्रत्येक सटोरिए और उसके करीबी परिवारजनों की अवैध संपत्ति की जांच कर उसे कुर्क किया जाए।
- इन सटोरियों को संरक्षण देने वाले पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो। उनकी संपत्ति, उनके मोबाइल फोन और बैंक खातों की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
अनुमान के मुताबिक रामगढ़ शहर में यह सट्टा बाजार 100 से 150 करोड़ रुपये का है, जो इससे भी अधिक हो सकता है।
हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि अब इस शहर में ऐसी किसी भी सामाजिक बुराई को पनपने नहीं दिया जाएगा। तभी यह सामाजिक बुराई जड़ से खत्म होगी।
भवदीय,
फहद अली
ब्लॉक कॉंग्रेस उपाध्यक्ष
मोबाइल: 9755512223









