Wednesday, February 4, 2026
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एफसीआई के अफसरानों की तानाशाही से स्थानीय ट्रांसपोर्टरों की रोजी रोटी संकट में , चहेते ट्रांसपोर्टरों को फायदा पहुंचाने का गंभीर आरोप

रायगढ़।
छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी चावल खरीदी योजना के तहत रेक लोडिंग और परिवहन व्यवस्था में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) एवं खाद्य विभाग से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों पर आरोप है कि वे निर्धारित नियमों को दरकिनार कर रेक लोडिंग के कार्य में मनमानी कर रहे हैं, जिससे स्थानीय ट्रांसपोर्टरों को जानबूझकर बाहर किया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, एफसीआई के प्रत्येक केंद्र से चावल का परिवहन रेक के माध्यम से किया जाता है, जिसके लिए परिवहन ठेका तय प्रक्रिया के अनुसार दिया जाना अनिवार्य है। इसके बावजूद आरोप है कि परिवहन कार्य में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही और अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।

स्थानीय वाहन मालिकों का कहना है कि उन्हें कभी बिना कारण ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता है, तो कभी उन्हें रेक लोडिंग से पूरी तरह वंचित कर दिया जाता है। इससे वर्षों से इस कार्य से जुड़े स्थानीय ट्रांसपोर्टरों की रोज़ी-रोटी पर सीधा असर पड़ रहा है।

इस पूरे मामले पर जब एफसीआई अधिकारियों से जवाब मांगा गया तो वे गोलमोल जवाब देते नजर आए। किसी ने स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि ब्लैकलिस्ट किस आधार पर की जा रही है और रेक लोडिंग का ठेका किन नियमों के तहत दिया जा रहा है।

वहीं, एफसीआई बिलासपुर के डीएम निर्देश मीणा ने ब्लैकलिस्ट के संबंध में अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि नियमों के विरुद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई की जा रही है, तो यह गलत है और मामले की जांच कराई जाएगी।

सूत्रों का कहना है कि यदि इस प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए, तो रेक लोडिंग और परिवहन से जुड़े कई और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई और उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहा है।

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