भाजयुमो अध्यक्ष ने धरने की बजाय युवाओं से पढ़ने का किया आह्वान
रायगढ़:- आज की युवा पीढ़ी UPI, स्मार्टफोन, 24 घंटे बिजली, हाईवे और सस्ते इंटरनेट के साथ बड़ी हुई है। उन्हें लगता है ये सुविधाएं हमेशा से रही है। लेकिन हम ये भूल जाते हैं कि सिर्फ 12 साल पहले भारत बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष कर रहा था। भाजयुमो की ओर से सुमीत शर्मा ने अहम तथ्य देश के यूवाओ के सामने रखते हुये कहा जो लोग यह पूछ रहे है कि मोदी सरकार ने किया ही क्या" यह दावा करने वालों को आईना दिखाना जरूरी है। 2011-12 में ग्रामीण भारत के सबसे गरीब 40% परिवारों की हालत क्या थी? सिर्फ 6.2% घरों में वाहन थे आज 47.1% लोग वाहनों का प्रयोग करते है इस अवधि में सिर्फ 2.9% घरों में फ्रिज था आज 22.5% घरों में फ्रिज है। पहले मोबाइल को विलासिता की सामग्री माना जाता था आज लगभग हर गरीब परिवार तक मोबाइल की पहुंच है। जिस घर में कभी नल का कनेक्शन नहीं था, आज वहां नल से जल आता है। जिस घर में शौचालय नहीं था, वहां आज सम्मान के साथ जीने की जगह है। 18,000 अंधेरे में डूबे गांव से 520 GW उजाले तक का सफर बताते हुए सुमीत शर्मा ने कहा 2014 से पहले 18,000 से अधिक गांवों में बिजली नहीं थी। सिर्फ 17% घरों में नल का पानी था। खुले में शौच सबसे बड़ी बीमारी थी। आज तस्वीर बदल चुकी है।11 करोड़ से अधिक शौचालय बन चुके हैं।80% से अधिक घरों तक नल का पानी पहुंचा ।बिजली उत्पादन 249 GW से बढ़कर 520 GW हो चुका है।नवीकरणीय ऊर्जा 32 GW से बढ़कर 275 GW हो चुकी हैं। 2 लाख से अधिक गांवों तक ऑप्टिकल फाइबर बिछ चुका। सड़क, रेल, बंदरगाह से जुड़े आंकड़े देखेंगे तो महसूस होगा कि भारत विकास की दौड़ लगा रहा.
एक्सप्रेसवे 1,000 किमी से बढ़कर 6,700 किमी तक जा पहुंचा। रेल विद्युतीकरण 21,000 किमी से बढ़कर 65,000 किमी तक जा पहुंचा। हवाई अड्डे 74 से बढ़कर 160 हो गए । बंदरगाह की क्षमता 800 MTPA से बढ़कर 2,760 MTPA हो चुकी। डिजिटल क्रांति के संबंध में युवा भाजपा नेता में कहा देश से कतारे खत्म हुई अब हर हाथों में मोबाइल है । जिस देश में बैंक की लाइन लगती थी, आज वहां हर महीने 18 अरब से अधिक UPI लेन-देन होते हैं। लगभग शून्य से शुरू होकर भारत दुनिया का Digital Payment Leader बन गया। मोबाइल निर्माण 6 करोड़ से बढ़कर 33 करोड़ वार्षिक जा पहुंचा।
रक्षा निर्यात 700 करोड़ से बढ़कर 23,000 करोड़ जा पहुंचा। ये बदलाव GDP का नहीं, गरिमा का है। सबसे बड़ी बात ये आंकड़े नहीं हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि आज सबसे गरीब परिवार के पास भी बाइक, टीवी , फ्रिज, स्मार्टफोन है। उसे सड़क, बिजली, बैंक, शौचालय और डिजिटल भुगतान की सुविधा मिली है। जिस पीढ़ी को केरोसिन के दीये में पढ़ना नहीं पड़ा, जिसे ट्रेन के टिकट के लिए हफ्ते भर इंतजार नहीं करना पड़ा, वो शायद इस बदलाव की गहराई नहीं समझ पाएगा। सुमीत शर्मा ने कहा चुनौतियां खत्म नहीं हुई। असमानता अभी भी है। लेकिन कुछ नहीं बदला कहना आंख बंद करके सच से मुंह मोड़ना है। पिछले 12 साल में मोदी सरकार ने आम आदमी के जीवन में सीधा बदलाव लाया है। ये बदलाव कागज पर नहीं, गरीब की रसोई, बेटी के शौचालय और युवा के मोबाइल में दिखता है। आज भारत सिर्फ बड़ी Economy नहीं बन रहा, आत्मसम्मान वाली Economy बन रहा है।
