रायगढ़ (छत्तीसगढ़)।
रायगढ़ के ऐतिहासिक जन्माष्टमी मेले में इस बार भक्ति और उत्साह की जगह बाहर से आए एक 'अत्याचारी' संचालक की तानाशाही की गूंज सुनाई दे रही है। शहर में डिज़ानीमेला लगाने पहुंचे बाहरी संचालक ' मून' पर स्थानीय महिलाओं का हक मारने और उनके साथ बेहद क्रूर व अपमानजनक व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगा है। विगत 8-9 सालों से जन्माष्टमी मेले में ईमानदारी और कड़ी मेहनत से काम करके अपने परिवार का पेट पालने वाली सावित्री नगर की महिलाओं ने इस बाहरी संचालक के खिलाफ हुंकार भर दी है। परेशान महिलाओं ने अब न्याय के लिए सीधे जिलाध्यक्ष (कलेक्टर) महोदय की शरण ली है।
मून संचालक का क्रूर रवैया: "250 में करो, वरना बाहर के बाउंसरों से पिटवाऊंगा!"
पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि जब वे इस साल भी रोजमर्रा की तरह काम मांगने डिज़ानीमेला के मून संचालक के पास गईं, तो उसने इंसानियत को ताक पर रखते हुए उन्हें दुत्कार कर भगा दिया।
मून ने स्थानीय महिलाओं को गुलामों की तरह आंकते हुए साफ कह दिया-
"अगर रोजाना सिर्फ 250 रुपये की कौड़ियों के भाव काम करना है तो करो, वरना दूसरों राज्यों से मजदूर बुलाऊंगा और तुम लोगों को हटाने के लिए बाहर के क्रूर बाउंसर तैनात कर दूंगा!"*
स्थानीय बहु-बेटियों का शोषण, बाहरी लोगों पर लुटा रहे 500 रुपये से ज्यादा की रोजी!
संचालक मून की इस तानाशाही का सबसे घिनौना चेहरा तब सामने आया जब पता चला कि जो काम रायगढ़ की स्थानीय महिलाएं बरसों से (यहाँ तक कि सुरक्षा और बाउंसरों तक का काम) संभालती आ रही थीं, उसी काम के लिए मून बाहरी लोगों को 500 रुपये से भी ज्यादा प्रति दिन की तगड़ी दिहाड़ी बांट रहा है।
लेकिन जब बात रायगढ़ की अपनी मेहनतकश महिलाओं की आती है, तो यह अत्याचारी संचालक उन्हें वाजिब हक देने के बजाय 250 रुपये में शोषित करने पर तुला है।
कलेक्टर से गुहारः 'बाहरी अत्याचारी से बचाएं, हमें हमारा हक दिलाएं' अत्याचारी मून की इस हरकत से गुस्साई प्रार्थी महिलाओं का कहना है कि वे कोई अनुचित मांग नहीं कर रही हैं। वे कलेक्टर द्वारा निर्धारित वाजिब और सरकारी रेट पर काम करने को तैयार हैं।
महिलाओं ने जिला प्रशासन से मांग की है कि रायगढ़ की धरती पर आकर रायगढ़ की ही बहु-बेटियों का हक छीनने वाले इस बाहरी संचालक मून पर लगाम कसी जाए और उन्हें डिज़ानीमेला में उनका वाजिब रोजगार व सम्मान तुरंत वापस दिलाया जाए।
