शहर के खरघाट केलो ब्रिज और पुराने रपटा पुल पर ठेकेदार की लापरवाही और निर्माण कार्य की घटिया गुणवत्ता को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। इस मार्ग पर रोज़ाना सैकड़ों मासूम बच्चों को ले जाने वाली स्कूल बसें और भारी-भरकम डंपर गुज़र रहे हैं, जिससे रपटा पुल की स्थिति अत्यंत जर्जर हो चुकी है और पुल पर खतरनाक दरारें (Cracks) उभर आई हैं।प्रशासनिक अनदेखी के कारण यहाँ कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
📌 न्यूज़ के मुख्य बिंदु (सरकारी दस्तावेज़ के अनुसार):
ठेकेदार एवं कार्यादेश की जानकारी:
कार्यालय नगर पालिका निगम, रायगढ़ द्वारा अधोसंरचना मद से 'खरघाट केलो ब्रिज सौंदर्यीकरण कार्य एवं पुराना रपटा पुल का जीर्णोद्धार' के लिए कार्यादेश (क्रमांक 65/लो.का.वि./न.पा.नि./2025, दिनांक 01/05/2025) जारी किया गया था। यह काम ठेकेदार संजय कुमार केडिया (स्टेशन रोड बाराद्वार, सक्ती) को सौंपा गया था।
₹89.78 लाख का बजट:
इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए ₹89,78,052/- की भारी-भरकम स्वीकृत अनुबंध राशि तय की गई थी।
समय-सीमा खत्म, फिर भी खस्ताहाल:
अनुबंध के अनुसार कार्य पूरा करने की समयावधि 11 माह (वर्षा ऋतु के साथ) तय की गई थी। इतना समय बीत जाने के बाद भी पुल सुधारने के बजाय और भी जर्जर स्थिति में पहुँच चुका है।
🕵️♂️ ठेकेदार की 'सेटिंग' से निगम का हर बड़ा काम इसी को? कौन है वो रसूखदार आका?
स्थानीय गलियारों में यह चर्चा ज़ोरों पर है कि आखिर क्यों नगर निगम के लगभग सभी बड़े और मलाईदार ठेके इसी एक ठेकेदार (संजय कुमार केडिया) को दे दिए जाते हैं?
निगम के बड़े आका का संरक्षण: सूत्रों की मानें तो नगर निगम के भीतर बैठे किसी बड़े अधिकारी या प्रभावशाली राजनेता की शह पर नियमों को ताक पर रखकर टेंडर इस ठेकेदार के पक्ष में सेट किए जाते हैं।
लापरवाही के बावजूद मेहरबानी: जब काम की गुणवत्ता इतनी घटिया है और जनसुरक्षा के साथ खिलवाड़ हो रहा है, तब भी निगम प्रशासन इस ठेकेदार पर मेहरबान क्यों है? आखिर कौन है वो बड़ा चेहरा जो ठेकेदार की इस लापरवाही पर पर्दा डाल रहा
कैप्शन: नगर पालिका निगम रायगढ़ द्वारा ठेकेदार को जारी किया गया स्वीकृत कार्यादेश पत्र।
🚨 नगर निगम और प्रशासन की क्या जिम्मेदारी है?
गुणवत्ता की जाँच (Monitoring):
नगर पालिका निगम रायगढ़ के जिम्मेदार अधिकारियों और उप-अभियंता (श्री ऋषि कुमार राठौर) की जिम्मेदारी थी कि वे समय-समय पर कार्य की गुणवत्ता की जाँच करते।
सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम:
जर्जर रपटा पुल पर भारी डंपरों के आवागमन पर रोक लगाना और स्कूली बच्चों व आम जनता की सुरक्षा तय करना नगर निगम का प्राथमिक कर्तव्य है।
लापरवाह ठेकेदार पर कार्रवाई:
मानकों के विपरीत काम करने और तय समय में जीर्णोद्धार न करने पर नगर निगम को संबंधित ठेकेदार पर पेनल्टी लगानी चाहिए, टेंडर रद्द कर उसे ब्लैकलिस्ट करना चाहिए।
🗣️ जनता का सीधा सवाल:
"क्या नगर निगम प्रशासन, उसके अफ़सर और ठेकेदार किसी बड़ी जनहानि या दुर्घटना का इंतज़ार कर रहे हैं? अगर रपटा पुल धंसता है, तो मासूम बच्चों और आम लोगों की जान का जिम्मेदार कौन होगा?"









