पिछले 3-4 महीने में विपुल ट्रांसपोर्ट के तेज रफ्तार कई गाड़ियों दुर्घटना होना और अभी कुछ दिन पहले बरौद खदान के पास कुरकुट नाला के पुल से एक बाइक सवार के द्वारा अपने आप को बचाने के कारण बाइक नाला में गिरना जिससे कि इस क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है। इस बीच, सामाजिक कार्यकर्ता / प्रबुद्ध जनों द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI) के तहत मांगी गई जानकारियों को आज तक दबाए रखने और गोलमोल रवैया अपनाने से कई चौकाने वाले संदेह पैदा हो गए हैं।
आरटीआई के तहत जामपाली खदान में विपुल एंटरप्राइजेज के कार्य, वर्क ऑर्डर, सब-कंट्रैक्टर की अनुमति, लेबर लाइसेंस और फेस से कोयला लिफ्टिंग व परिवहन का पूरा ब्योरा मांगा गया था। लेकिन जानकारी सामने न आने से निम्नलिखित संगीन सवाल और शंकाएं जोर पकड़ने लगी हैं—
RTI के तहत जवाब न मिलने पर उठ रहे प्रमुख सवाल:
पारदर्शिता और प्रक्रियात्मक देरी: कानून के तहत मांगी गई विभागीय जानकारियों को तय समय-सीमा में न उपलब्ध कराना प्रक्रियात्मक निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। जनहित से जुड़ी इन जानकारियों को साझा करने में आखिर किस वजह से देरी हो रही है?
निगरानी और ग्रेडिंग व्यवस्था की जांच की मांग: खदान के फेस से डंपिंग और परिवहन के दौरान कोयले की गुणवत्ता (ग्रेडिंग) नियंत्रण व निगरानी प्रणाली कितनी मजबूत है, इसे लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। पारदर्शी दस्तावेज सामने आने से ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
दीर्घकालिक अनुबंधों की समीक्षा का विषय: पिछले कई वर्षों से एक ही एजेंसी द्वारा परिवहन कार्य किए जाने के संदर्भ में यह मांग उठ रही है कि क्या सभी प्रतिस्पर्धात्मक और सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है?
दुर्घटनाओं के बाद सुरक्षा मानकों का पालन: क्षेत्र में हो रहे सड़क हादसों के बाद भारी वाहनों की तकनीकी जांच और चालकों के नियमों के अनुपालन को लेकर स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि हर हादसे की निष्पक्ष जांच हो और सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए।
निष्कर्ष:
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और समाजसेवियों का मानना है कि आरटीआई के तहत चाही गई जानकारियों को सार्वजनिक करने से पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और ग्रामीणों के मन में उठ रही आशंकाओं का समाधान हो सकेगा।









