मीना बाजार: अभी सिर्फ खड़ा हुआ है दुकानों का 'स्ट्रक्चर', लेकिन शुरू हो गया GST चोरी का बड़ा खेल!


​रायगढ़: 16 जुलाई 2026
​शहर के मौदहापारा और ट्रांसपोर्ट नगर में लगने वाले 'मीना बाजार' की तैयारियां अभी शुरुआती दौर में हैं। मैदान में अभी केवल लोहे के पाइप, बांस-बल्ली और दुकानों के 'स्ट्रक्चर' (फ्रेम) ही खड़े किए जा रहे हैं। मेला अभी पूरी तरह शुरू भी नहीं हुआ है, लेकिन इसके पीछे GST (वस्तु एवं सेवा कर) की चोरी का एक बड़ा ताना-बाना अभी से बुन दिया गया है।
​नियमों को ताक पर रखकर बिना एडवांस टैक्स जमा किए और बिना वैध रजिस्ट्रेशन के ही सैकड़ों दुकानों का ढांचा खड़ा कर दिया गया है, जिससे वाणिज्यिक कर विभाग के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ती दिख रही हैं।
​स्ट्रक्चर लगते ही कहाँ हो रही है टैक्स की चोरी?
​आप सोच रहे होंगे कि अभी तो दुकानें सजी भी नहीं हैं, तो टैक्स चोरी कैसे हो रही है? दरअसल, GST नियमों के अनुसार खेल यहीं से शुरू होता है:
​कैजुअल टैक्सपेयर नियम का उल्लंघन: नियम यह कहता है कि किसी भी राज्य या जिले से आकर मेले में दुकान लगाने वाले बाहरी व्यापारी को स्टॉल का स्ट्रक्चर खड़ा करने या सामान उतारने से कम से कम 5 दिन पहले 'कैजुअल टैक्सपेयर' (Casual Taxable Person) के तहत GST रजिस्ट्रेशन कराना होता है और अनुमानित टर्नओवर का एडवांस टैक्स सरकार को जमा करना होता है। लेकिन यहाँ बिना किसी पंजीकरण के धड़ल्ले से पंडाल ताने जा रहे हैं।
​स्टॉल आवंटन का 'कैश' खेल: मीना बाजार के मुख्य आयोजकों द्वारा व्यापारियों को स्टॉल बांटे जा रहे हैं। इन स्टॉल्स और स्ट्रक्चर के किराए के एवज में व्यापारियों से लाखों रुपये एडवांस लिए जा चुके हैं। आरोप है कि आयोजकों द्वारा यह पूरा लेनदेन 'कैश' (नकद) में किया गया है, ताकि इस पर लगने वाले 18% GST की सीधे तौर पर चोरी की जा सके।
​स्थानीय व्यापारियों में भारी आक्रोश: "प्रशासन की शह पर हो रहा खेल"
​मेले का ढांचा खड़ा होते ही स्थानीय निवासियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। यहाँ के निवासियों का कहना है कि प्रशासन और विभाग की नाक के नीचे यह अवैध खेल शुरू हो चुका है।
​"अभी सिर्फ लोहे के एंगल और पंडाल लगे हैं। अगर विभाग अभी इसी वक्त हर एक स्ट्रक्चर और आयोजक के खातों की जांच करे, तो करोड़ों की टैक्स चोरी पकड़ी जाएगी। जब दुकानें सज जाती हैं और भीड़ बढ़ जाती है, तब अधिकारी भीड़ का बहाना बनाकर कार्रवाई से बचते हैं।"

​अधिकारियों के पास नहीं है कोई रिकॉर्ड
​सूत्रों के मुताबिक, वाणिज्यिक कर विभाग (Commercial Tax Department) के पास अभी तक इस मीना बाजार में दुकान लगाने आ रहे 80% से अधिक व्यापारियों का कोई लेखा-जोखा या एडवांस टैक्स जमा होने का रिकॉर्ड नहीं है। नियमानुसार, बिना रजिस्ट्रेशन के मेले के मैदान में व्यावसायिक सामग्री (Commercial Goods) उतारना ही गैरकानूनी है।
​क्या स्ट्रक्चर लगने के दौरान ही होगी कार्रवाई?
​मीना बाजार अभी आकार ले ही रहा है। ऐसे में जागरूक नागरिकों का कहना है कि बीमारी का इलाज शुरुआत में ही कर देना चाहिए। अब देखना यह है कि क्या वाणिज्यिक कर विभाग इस शुरुआती चरण में ही अपनी आंखें खोलेगा और इन अवैध स्ट्रक्चरों और आयोजकों पर शिकंजा कसेगा, या फिर हर बार की तरह मेला खत्म होने और टैक्स चोरों के भाग जाने का इंतजार करेगा।

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